जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार करें बीजों का चुनाव : एडीओ एजी अनूप सिंह चौहान

जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार करें बीजों का चुनाव : एडीओ एजी अनूप सिंह चौहान 

रिपोर्ट:- आर के मिश्रा

परसपुर गोण्डा।। रबी सीजन में गेहूं की बेहतर पैदावार प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्मों के बीजों का चयन करना बेहद जरूरी है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी की प्रकृति और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार ही गेहूं की प्रजातियों का चयन करना चाहिए। सही किस्म के चुनाव से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में सुधार कर किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है।

एडीओ एजी अनूप सिंह चौहान ने बताया कि गेहूं की बुवाई के समय और खेत में उपलब्ध सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखकर बीज का चयन करना चाहिए। समय से बुवाई वाले सिंचित क्षेत्रों में उपयुक्त उन्नत प्रजातियों का इस्तेमाल करने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, धान की कटाई में देरी या अन्य कारणों से पछेती बुवाई करने वाले किसानों को उसी के अनुरूप किस्मों का चयन करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की खेती के लिए एचडी-2967, डीबीडब्ल्यू-187 (करण वंदना), डीबीडब्ल्यू-222 (करण श्रेयस), एसआरडब्ल्यू-355 और पीबीडब्ल्यू-725 जैसी किस्में प्रचलित हैं। वहीं, पछेती बुवाई के लिए डीबीडब्ल्यू-173, एचडी-3059, पीबीडब्ल्यू-590 और राज-3077 जैसी किस्मों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इनका चयन स्थानीय कृषि-जलवायु क्षेत्र और कृषि विभाग की नवीनतम संस्तुतियों के अनुसार करना चाहिए।

कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी रखें ध्यान

एडीओ एजी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन सीमित हैं या खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है, वहां कम पानी में बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्मों का चयन करना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही खेत की मिट्टी की स्थिति, नमी और बुवाई के समय को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने बताया कि गेहूं की कुछ किस्में विशेष गुणवत्ता के लिए भी उपयोगी हैं। उदाहरण के तौर पर, पीबीडब्ल्यू आरएस-1 कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले गेहूं के लिए विकसित की गई है, जबकि ड्यूरम गेहूं की कुछ किस्मों का उपयोग सूजी, पास्ता और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है।

प्रमाणित बीजों का करें इस्तेमाल

एडीओ एजी अनूप सिंह चौहान ने किसानों को सलाह दी कि वे अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करें और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के साथ फसल की समय-समय पर निगरानी करें। बीज खरीदने से पहले उसकी किस्म, बुवाई का उपयुक्त समय और क्षेत्र के लिए उसकी अनुशंसा की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

उन्होंने कहा कि किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क कर क्षेत्र के अनुकूल उन्नत किस्मों की जानकारी लें। उन्नत बीज, उचित कृषि प्रबंधन और समय पर बुवाई अपनाकर किसान गेहूं की पैदावार बढ़ाने के साथ अपनी आमदनी में भी सुधार कर सकते हैं।


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