मक्का में फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए समय पर करें कीटनाशकों का प्रयोग
मक्का में फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए समय पर करें कीटनाशकों का प्रयोग
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रुगिपरडा) के प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को समय पर अनुशंसित कीटनाशकों के प्रयोग की सलाह दी गयी। विशेषज्ञों के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट, स्पिनेटोरम तथा क्लोरान्ट्रानिलिप्रोले जैसे सक्रिय तत्वों का विकास अवस्था के अनुसार उपयोग करने से कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
विकास खण्ड परसपुर के एडीओएजी अनूप सिंह चौहान ने बताया कि पौधे की प्रारंभिक अवस्था (बुवाई के चार सप्ताह तक) में यदि 5 प्रतिशत तक क्षति दिखाई दे तो 5 प्रतिशत नीम बीज कर्नेल एक्सट्रेक्ट (एनएसकेई) या एज़ाडिराक्टिन 1500 पीपीएम जैसे जैव एवं नीम आधारित उत्पादों का प्रयोग करें। वहीं 5 से 7 सप्ताह की अवस्था में 10 से 20 प्रतिशत ताजा क्षति होने पर स्पिनेटोरम 11.7% एससी (0.5 मिली/लीटर), क्लोरान्ट्रानिलिप्रोले 18.5% एससी (0.4 मिली/लीटर), इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी अथवा थियामेथॉक्सम 12.6% + लैम्डा-साइहलोथ्रिन 9.5% जेडसी (0.25 मिली/लीटर) का फसल की फनल में लक्षित छिड़काव करें।
उन्होंने किसानों को सलाह देते हुये कहा कि फूल निकलने एवं रेशम बनने की अवस्था में रासायनिक छिड़काव से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय लार्वा बालियों के भीतर छिपे रहते हैं और रासायनिक अवशेष का जोखिम भी बढ़ जाता है।किसानों को सुबह 8:30 बजे से पहले अथवा शाम 4 बजे के बाद छिड़काव करने, स्प्रे नोजल को सीधे मक्के की फनल में लगाने तथा प्रतिरोध विकसित होने से रोकने के लिए अलग-अलग सक्रिय तत्वों वाले कीटनाशकों का बारी-बारी से प्रयोग करने की सलाह दी गई है।


