77वीं जंयती पर याद किये गये जनकवि अदम गोंडवी
77वीं जंयती पर याद किये गये जनकवि अदम गोंडवी
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। विकास खण्ड परसपुर अन्तर्गत गजराज पुरवा आटा में एक साधारण परिवार में जन्मे रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी की 77वीं जयंती के अवसर पर परिजनों सहित क्षेत्र के समाजसेवी संगठनों व कवि तथा शायरों ने नमन कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये उन्हें याद किया।
इस जयंती के अवसर पर परसपुर विकास मंच अध्यक्ष डॉक्टर अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अदम गोंडवी का जन्म 22 अक्टूबर 1947 को उत्तर प्रदेश के जनपद गोण्डा अन्तर्गत विकास खण्ड परसपुर की ग्राम पंचायत आटा पूरे गजराज सिंह में हुआ। उन्हें हिंदी में दुष्यंत कुमार के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय कवि-ग़ज़लकार माना जाता है। उनकी कविता ‘मनुष्यता की मातृभाषा’ में निर्धनों, वंचितों, दलितों, श्रमिकों और उत्पीड़न का शिकार स्त्रियों की फ़रियाद लेकर आती है।
वहीं कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्रा ने अदम जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि पिछड़ों,शोषितों की आवाज उठाने के कारण रामनाथ सिंह अदम को जनकवि की उपाधि मिली। वह अपनी बागी छवि के कारण हमेशा शासन- प्रशासन से दो-दो हाथ करते नजर आये।उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं सामाजिक-राजनीतिक विमर्श में उनके ग़ज़ल की पंक्तियाँ बार-बार उद्धृत होती रहती हैं।
"आइए महसूस करिए ज़िंदगी के ताप को",
"मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आप को"।
कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी एक पंक्ति बेहद प्रसिद्ध हुई थी।
"काजू भूनें हुए प्लेट में व्हिस्की है गिलास में",
"रामराज्य उतरा है रामराज्य विधायक निवास में"।
‘धरती की सतह पर’, ‘समय से मुठभेड़’ और ‘गर्म रोटी की महक’ उनके तीन कविता-ग़ज़ल-संग्रह हैं। 1998 में उन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने दुष्यंत कुमार पुरस्कार से सम्मानित किया। हिंदी के साथ ही अवधी में उनके योगदान के लिए उन्हें माटी रतन सम्मान से नवाज़ा गया। 18दिसंबर, 2011 को उन्होंने अपने नश्वर रूपी शरीर को त्यागकर इस संसार से विदा हो गये।
इस दौरान डॉ0 अरुण कुमार सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष वासुदेव सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्रा,बी डी सिंह,कमला सिंह आलोक सिंह,बृजेश सिंह, रामरती पाण्डेय,विक्रम सिंह ,हंसराज (अध्यापक) मौजूद रहे।

