"आओ सच्ची दिवाली मनायें" केन्द्र संचालिका अनामिका बहन ने दीप जलाकर दीपोत्सव का किया शुभारंभ
"आओ सच्ची दिवाली मनायें" केन्द्र संचालिका अनामिका बहन ने दीप जलाकर दीपोत्सव का किया शुभारंभ
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। नगर पंचायत परसपुर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केन्द्र पर दीपोत्सव मनाया गया जहां सेवा केन्द्र के भाई बहिनों एवं माताओं ने दीपावली पर्व के आध्यात्मिक रहस्य को जाना।ब्रह्माकुमारी अनामिका बहिन ने आये हुए भाई-बहनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पांच हजार वर्ष पूर्व एक अति श्रेष्ठ समय था जबकि इस सृष्टि पर धरा को जगमग करने के लिए परम ज्योति निराकार परमात्मा का अवतरण हुआ था।वह समय कलयुग के अंत का था।जब परमात्मा ने सत्य ज्ञान देकर सभी मनुष्यों की बुझी आत्म ज्योति जगाई थी। तब मनुष्य आत्माओं का अपने परमपिता से मिलन हुआ था वह इस सृष्टि की सबसे शुभबेला थी। वही सच्ची दिवाली थी।बाद में तो मात्र उसकी यादगार ही है!
एक रचना प्रस्तुत करते हुए ब्रह्मा कुमारी अनामिका बहिन ने कहा कि .....कैसे दिपावली मनाएं?
कांपते हाथों से कैसे, कौन-सा दीपक जलायें,
हर तरफ मातम मचा है, कैसे दीवाली मनाएं ❓
शोक के सागर में डूबा आज का संसार है,
बैर, घृणा, स्वार्थ, अत्याचार की भरमार है।
कुटिलताओं ने कलंकित कर दिया है धर्म को,
धारणा ही धर्म है- भूले सभी इस मर्म को।
अब तो इस संसार को भगवान ही चाहे बचायें.......
हर तरफ मातम मचा है........... कैसे दिवाली मनाएं ❓
आगे बताया कि अब हर वर्ष यादगार रूप में दीपावली मनाते युग बीत गए ।ना लक्ष्मी आई, ना ज्योति जगी ।अब समय है जबकि परमपिता परमात्मा स्वयं ज्ञान घृत द्वारा मनुष्य आत्माओं की ज्योति जगा रहे हैं -तो हम सभी का आवाह्न करते हैं कि आओ हम सभी मनुष्य सत्य परमात्मा से सत्य ज्ञान लेकर अपने जीवन को पावन बनाएं अर्थात ज्योति जगाएं और ईश्वरीय मिलन का वास्तविक सुख प्राप्त करें।तब ही यहां पृथ्वी पर स्वर्ग आएगा 'जहां श्री लक्ष्मी मां से नारायण का राज्य होगा! जो ऐसी सच्ची थी वाली मनाएंगे वही स्वर्ग के अधिकारी बनेंगे जहां रोज ही दीपावली होगी!
दीवाली आई दीप जलाओ
परमपिता से मिलान मानाओ
संगम के इस पावन युग में
ज्ञान से आत्म ज्योति जगाओ।
उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी विचार किया है कि श्री लक्ष्मी के स्वागत के लिए प्रतिवर्ष दीप माला जलाकर भी भारत वर्ष क्यों दरिद्र हो गया हैं?जगमगाते दीपों को देखकर भी श्री लक्ष्मी क्यों हमसे रूठ गई हैं ?जलते हुए दीप उनको आकर्षित क्यों नहीं कर पाते?वह कौन सा दीप जलाना चाहती हैं ?वस्तुतः आत्मा ही सच्चा दीपक है !विकारों के वशीभूत हो जाने के कारण आत्मा का प्रकाश आज मालिन हो गया है।मनुष्य की अंतरात्मा तमसाच्छन है!
ब्रम्हाकुमारी अनामिका बहन दीप प्रज्वलन कर
दीपोत्सव का किया श्रीगणेश
ऐसे विकारी मनुष्यों के बीच श्री लक्ष्मी का शुभागमन कैसे हो सकता है ?लेकिन कितनी विडंबना भरी बात है कि आत्म-दीप प्रज्वलित कर कमल पुष्प सदृश्य अनासक्त बन कमलासीन श्री लक्ष्मी का आवाहन करने की जगह हम मिट्टी के दीप जलाकर बच्चों का खेल खेलते रहते हैं। मन मंदिर की सफाई करने की जगह वाह्य सफाई से ही हम खुश हो जाते हैं ।तभी तो श्री लक्ष्मी हमसे रूठ गई गई है।अमावस्या की काली रात की तरह आज चतुर्दिक घोर अज्ञान अंधकार छाया हुआ है। कहीं कुछ सूझ नहीं रहा है ।मन् मतान्तर के जाल में मानव मात्र भ्रमित है। सभी आत्माओं की ज्योति बुझ चुकी है। ऐसे समय में सदा जागती ज्योति निराकार परमपिता परमात्मा शिव सर्व आत्माओं की ज्योति जगाने के लिए कल्प पूर्व की भांति इस धरा धाम पर अवतरित हो चुके हैं और प्रायः लोप गीता ज्ञान तथा सहज राजयोग की शिक्षा दे रहे हैं ।निर्विकारी बन उस सदा जागती ज्योति से अपनी आत्मा का दीपक जगा कर ही हम सच्ची दीपावली मना सकते हैं। तभी ही इस देव भूमि भारतवर्ष पर से लक्ष्मी श्री नारायण के दैवी स्वराज की पुनर्स्थापना होगी जहां रत्न जड़ित स्वर्ग महल होंगे और घी दूध की नदियां बहेंगी ।इस युगांतरकारी घटना की पावन स्मृति में ही हम दीपावली का त्यौहार मनाते हैं ।इस अवसर पर सदा जागती ज्योति निराकार परमात्मा शिव का प्रतीक एक बड़ा दीप जलाया जाता है और उसी से अन्य दीपकों की ज्योति जलाई जाती है ।अन्य किसी दीपक देवता के मंदिर में सदा दीप नहीं जलता है लेकिन आज भी भगवान विश्वनाथ के मंदिर में अनवरत दीप जलता रहता है। क्योंकि एक मात्र निराकार परमात्मा शिव ही सदा जगती ज्योति हैं।दीपोत्सव के पावन अवसर पर रामेंद्र नारायण सिंह,बी के अनूप भाई राधेश्याम "हिमांशु, ज्ञान चंद,राम कुमार पांडेय, राघवेन्द्र पाण्डेय, कमला प्रसाद सिंह,उमा रमा मन्ना पिंकी सुषमा सुंदर पता आदि उपस्थित रहीं।



