जब जब पृथ्वी पर पाप एवं अत्याचार बढ़ता है तब तब भगवान का अवतार होता है...... पं0 ललित कृष्ण महराज

 


जब जब पृथ्वी पर पाप एवं अत्याचार बढ़ता है तब तब भगवान का अवतार होता है...... पं0 ललित कृष्ण महराज

रिपोर्ट:- आर के मिश्रा

 परसपुर गोण्डा।। विकास खण्ड परसपुर अन्तर्गत ग्राम पंचायत मधईपुर खांडेराय स्थित श्री बैरिहा ब्रम्हचारी बाबा के स्थान पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में अवध धाम से पधारे कथा व्यास पं0 ललित कृष्ण महराज ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब धरती पर कंस का अत्याचार बढ़ा तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु की स्तुति कर कंस रूपी दानव से निजात दिलाने के लिये प्रार्थना किया। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा स्थित कंस के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण की बाल लीला के प्रसंग का बहुत ही मार्मिक वर्णन करते  हुए कहा कि श्रीकृष्ण बहुत नटखट थे। कंस  ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए राक्षसी पूतना सहित अकासुर, बकासुर,शकटासुर नामक दैत्यों को भेजा कृष्ण ने स्तनपान के बहाने प्राणों का पान कर पूतना नामक राक्षसी का उद्धार किया। 

भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा कर इन्द्र के अभिमान को चूर किया। प्रवाचक ने कालिया नाग मर्दन की का प्रसंग सुनातें हुए कहा कि कालिया नाम का नाग पक्षीराज गरुड़ से दुश्मनी होने कारण गोकुल के पास बहने वाली यमुना नदी में आकर रहने लगा था. जिससे पूरी यमुना नदी में कालिया का विष फैल गया। श्रीकृष्ण ने यमुना नदी में विष फैला रहे कालिया नाग को अपने वश में कर, उसे नदी छोड़ने को कहा जिससे यमुना फिर से स्वच्छ हो गई। कथा के दौरान जय सिंह, अन्नू सिंह, सतीश,सोनू,अभय सहित तमाम श्रोतागण मौजूद रहे।

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