"दीपों की नहीं, आत्मा की हो ज्योतिर्मय सजावट" — ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन
"दीपों की नहीं, आत्मा की हो ज्योतिर्मय सजावट" — ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। नगर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, परसपुर सेवा केंद्र पर दीपावली के पावन अवसर पर दीपोत्सव समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान मां लक्ष्मी की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भावनाओं से अभिभूत कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन ने कहा कि दीपावली केवल दीपों से घरों को सजाने का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को ज्ञान और गुणों से आलोकित करने का अवसर है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने, आत्मनिरीक्षण करने और जीवन को सकारात्मक मूल्यों से भरने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार घर की सफाई की जाती है, उसी प्रकार मन, विचार और आत्मा की सफाई भी आवश्यक है। दीपावली सच्चे अर्थों में तभी सार्थक होगी जब हम क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक विकारों का अंत कर पवित्रता, प्रेम, दया और शांति जैसे गुणों को जीवन में स्थान देंगे।
ब्रह्माकुमारी बहन ने भारत की प्राचीन संस्कृति की ओर संकेत करते हुए कहा कि एक समय था जब भारत स्वर्ग समान था — जहां श्रीकृष्ण जैसे सोलह कला संपूर्ण देवता, दिव्यता और आनंद से ओतप्रोत समाज का संचालन करते थे। आज जब मानवता अज्ञान और विकारों के अंधकार में भटक रही है, परमात्मा स्वयं दिव्य ज्ञान और राजयोग के माध्यम से आत्माओं को पुनः जाग्रत कर रहे हैं।
उन्होंने उपस्थितजनों से आग्रह किया कि केवल बाहरी दीप जलाना पर्याप्त नहीं, आत्मा के दीप को भी जगाना होगा। यही श्रीलक्ष्मी का सच्चा वरदान होगा और यही दीपावली की आत्मिक सार्थकता है।कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति भाव और दिव्य प्रकाश से परिपूर्ण रहा। अंत में सेवा केंद्र की ओर से यह संदेश दिया गया कि दीपावली केवल बाहरी रोशनी का नहीं, भीतर की आत्मिक ज्योति को प्रज्वलित करने का पर्व है।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी, राजकुमार मिश्रा, रामकुमार पांडेय, रामेन्द्र नारायण सिंह, राधेश्याम मिश्रा, अनूप सिंह, सुनील गुप्ता, संध्या सिंह, उमा, रमा, सुषमा, मन्ना, ज्योति, ऊषा, लक्ष्मी व अन्य श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।





