ब्रह्माकुमारी केंद्र पर सजी चैतन्य देवियों की झांकी, विकारों पर विजय को बताया असली दशहरा
राजयोगिनी बहन अनामिका बोलीं – पुतला नहीं, बुराइयों को जलाइए तभी मिलेगा सच्चा सुख
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र, परसपुर में आध्यात्मिक संदेशों से परिपूर्ण एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान चैतन्य देवियों की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दशहरे के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करना रहा। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि, “वास्तविक दशहरा केवल रावण का पुतला जलाने से नहीं मनाया जाता, बल्कि मन में छिपे विकार रूपी रावण — काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, आलस्य, द्वेष, हठ और हिंसा — को समाप्त करना ही सच्ची विजयादशमी है।”उन्होंने कहा कि आज के भौतिकतावादी समाज में मनुष्य अपने स्वार्थ, लालच और दिखावे के पीछे इतना भाग रहा है कि संस्कार, संबंध और संवेदना को भुला बैठा है। "एक ओर लोग देवी के चरणों में फूल चढ़ाते हैं, लेकिन जीवन में उन्हीं के गुणों को अपनाने से परहेज़ करते हैं। ऐसे में क्या देवी की कृपा संभव है?" — उन्होंने सवाल उठाते हुए समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया।
चैतन्य देवियों की जीवंत झांकी रही आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई चैतन्य देवियों की झांकी को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। झांकी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी शक्ति केवल पूजा की नहीं, आदर, आत्मबल और आदर्श की प्रतीक है।
इस अवसर पर राधेश्याम मिश्रा, डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी, अनूप सिंह, कमला प्रसाद सिंह, राघवेन्द्र पांडेय, पवन कुमार सिंह, सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। एंजल अनुष्का, उमा देवी, पूनम देवी, उपमा, रमा, सुषमा, मन्ना, ज्योति, पूजा, बबिता, और राधा सुंदर पता आदि ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
👉 मुख्य संदेश: "दशहरा तब सार्थक है जब हम अपने भीतर के रावण को पहचानें और उसे जलाएं। तभी समाज और आत्मा दोनों में सच्ची विजय होगी।"कार्यक्रम का समापन राजयोग और सत्संग के साथ हुआ, जिसमें सभी को आंतरिक शांति और आत्म-परिवर्तन का संकल्प दिलाया गया।



