गृहस्थ जीवन ही सच्चा तपोवन...... ब्रह्माकुमारी अनामिका दीदी


गृहस्थ जीवन ही सच्चा तपोवन...... ब्रह्माकुमारी अनामिका दीदी

रिपोर्ट:- आर के मिश्रा

परसपुर गोण्डा।। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय परसपुर सेवा केन्द्र पर आज आयोजित प्रवचन सभा में "गृहस्थाश्रम एक जीवन साधना" विषय पर बोलते हुए सेवा केंद्र की प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनामिका दीदी ने कहा कि परमात्मा हमें कर्मयोगी बनने की शिक्षा देते हैं, न कि संसार से पलायन करने की।दीदी ने स्पष्ट किया कि गृहस्थ जीवन कोई बंधन नहीं, बल्कि यह सबसे श्रेष्ठ आश्रम है, जहाँ रहकर आत्मा अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ईश्वर की याद और योग के माध्यम से स्वयं को पावन बना सकती है। उन्होंने कहा कि माया या विकार बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अपने मनोवृत्तियों में होते हैं।इस दौरान एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक जैसे अनेकों महापुरुषों ने गृहस्थ जीवन में रहकर ही परम पद को प्राप्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मन पवित्र है और विचार श्रेष्ठ हैं, तो घर का हर कोना एक तपोवन बन सकता है।

केंद्र संचालिका ने कहा कि कई बार संन्यास को माया से मुक्ति का मार्ग मान लिया जाता है, जबकि सच्ची साधना वही है जो जिम्मेदारियों को निभाते हुए की जाए। अगर कोई यह सोचता है कि बिना संघर्ष के सफलता मिलेगी तो यह वैसा ही है जैसे कोई अखाड़े में जाए बिना पहलवान बनने की कल्पना करे।

      कार्यक्रम में उपस्थित जिज्ञासुओं के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अगर दिन में कुछ समय राजयोग का अभ्यास करे, तो उसके विचार, व्यवहार और संस्कार में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं। यही परिवर्तन उसके संसार को श्रेष्ठ बनाते हैं।

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