पौष पूर्णिमा पर पसका त्रिमुहानी घाट पर उमड़ा आस्था का महासागर
👉लघु प्रयाग में लाखों श्रद्धालुओं ने किया सरयू-घाघरा संगम पर स्नान-दान......
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर जनपद गोण्डा अंतर्गत परसपुर विकासखंड में सूकरखेत पसका के त्रिमुहानी घाट पर शनिवार को आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर पहर से ही सरयू नदी के त्रिमुहानी घाट पर स्नान-दान के लिए महिला पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।आस्था के इस सैलाब को देखकर अनुमानित तकरीबन एक लाख से अधिक लोंगों ने मैया सरयू में पावन डुबकी लगाई।
स्नानोपरांत भगवान वाराह मन्दिर पर दर्शन करने हेतु श्रद्धालुओं का लगा तांता
‘लघु प्रयाग’ के नाम से विख्यात इस पवित्र तीर्थ स्थल पर भोर पहर से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जो कि पूरे दिन अनवरत जारी रहा। श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान वाराह के दर्शन किया।
शास्त्रों के अनुसार जब हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने पृथ्वी का हरण कर लिया,तो समस्त जीव जंतु चर सचराचर, देवी देवता सभी घबरा गये कि अब तो सभी का अंत निश्चित है। इस भय से सभी ने मिलकर भगवान विष्णु की स्तुति करने लगे।देवी देवताओं की पीड़ा सुनकर भगवान विष्णु ने वाराह (सुअर) का स्वरूप धारण कर यहीं पर महापापी दैत्य हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को मुक्त कराया।मान्यता है कि हिरण्याक्ष का वध करने के पश्चात भगवान वाराह ने इसी पतित पावनी सरयू नदी में स्नान किया।तभी से इस क्षेत्र को सूकर खेत के नाम से जाना जाता है।
यहाँ पर बीते एक माह से साधु-संतों और श्रद्धालुओं द्वारा कल्पवास किया जा रहा है।
मेले में बेहतरीन प्रदर्शन करते मौत के कुएँ के कलाकार
स्नान दान एवं भगवान वाराह के दर्शन के पश्चात संगम तट पर लगे मेले का भी श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। महिलाओं और बच्चों के लिए मेले में मनोरंजन के विशेष आकर्षण में विभिन्न प्रकार के झूले,ड्रेगन ट्रेन,मौत का कुआं,मैजिक शो,सहित अन्य तमाम संशाधन उपलब्ध रहे।वहीं मेले में दैनिक उपयोगी वस्तुओं समेत खाने पीने की दुकानें भी सजी रहीं।जहाँ पर महिलाओं एवं बच्चो ने जमकर खरीदारी की।
मेले में विभिन्न प्रकार के झूलों का लुफ्त उठाते लोगइस बावत थानाध्यक्ष अनुज त्रिपाठी ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। मेला क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में उपनिरीक्षक समेत महिला पुरूष आरक्षियों की तैनाती रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र में सभी तरफ से दुपहिया एवं चौपहिया वाहनों के प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहा। वहीं थानाध्यक्ष के साथ साथ पुलिस चौकी प्रभारी सावन कुमार सिंह मेले में भ्रमणशील रहते हुये सभी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाये हुये थे।मेले में बने अस्थायी खोया पाया कैम्प के सुरक्षाकर्मियों द्वारा तकरीबन आधा दर्जन से अधिक मेले में परिजनों से बिछड़ जाने वाली महिलाओं तथा बच्चों को उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया।
दुकानों पर दैनिक उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करते मेलार्थी
जिला मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर स्थित सूकरखेत पसका (लघु प्रयाग) सदियों से धार्मिक आस्था, पौराणिक महत्व और जनविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां हर वर्ष पौष पूर्णिमा पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।






