सीता स्वयंवर प्रसंग से गूँजा गूँगी भवानी मंदिर, राम ने तोड़ा शिव धनुष
सीता स्वयंवर प्रसंग से गूँजा गूँगी भवानी मंदिर, राम ने तोड़ा शिव धनुष
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। नगर के गूँगी भवानी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीरामकथा के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथावाचक पंडित सूरज जी महाराज ने सीता स्वयंवर प्रसंग का भावपूर्ण व्याख्यान करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र से अवगत कराया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो पूरे समय मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसपान करते रहे।
कथावाचक ने बताया कि महर्षि विश्वामित्र ने अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राक्षस बार-बार यज्ञ में विघ्न डालते हैं, जिससे ऋषियों का तप और धार्मिक कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रारंभ में पुत्रों के वियोग की आशंका से राजा दशरथ चिंतित हो उठे, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने और महर्षि विश्वामित्र के आग्रह पर उन्होंने राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेजने की अनुमति प्रदान कर दी।
संगीतमयी कथा का रसास्वादन कराते पं सुरज जी महराजवन यात्रा के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण ने ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर ऋषियों के यज्ञ की सफलतापूर्वक रक्षा की। इसके पश्चात महर्षि विश्वामित्र दोनों भाइयों को लेकर मिथिला नगरी पहुंचे, जहां राजा जनक द्वारा सीता स्वयंवर का भव्य आयोजन किया गया था।
स्वयंवर की शर्त अत्यंत कठिन थी—जो भी वीर शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वरण कर सकेगा। देश-विदेश से आए अनेक बलशाली राजा और योद्धा इस परीक्षा में असफल रहे। अंततः भगवान श्रीराम ने गुरु की आज्ञा से धनुष को उठाया और जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष भंग हो गया। यह दृश्य देख सभा में उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए और सीता जी ने भगवान राम को अपना वर चुन लिया।
श्रीराम एवं माता जानकी की अद्भुत झांकी के दर्शनकथावाचक ने कहा कि राम-सीता विवाह केवल एक वैवाहिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि विनम्रता, आज्ञाकारिता और कर्तव्यनिष्ठा ही सच्चे जीवन की पहचान हैं।
सीता राम जी के व्याह की कथा श्रवण करती महिलाएं एव बच्चेकथा के दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसका दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने सभी भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए कथा के आगामी प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आह्वान किया।



