धरती माता के उद्धार का पर्व, आज 25 अगस्त को मनाई जाएगी वराह जयंती
धरती माता के उद्धार का पर्व, आज 25 अगस्त को मनाई जाएगी वराह जयंती
आर के मिश्रा.....
गोण्डा।।भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह देव का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष वराह जयंती सोमवार, 25 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी।इसे धरती माता के उद्धार और धर्म की स्थापना का पर्व माना जाता है।जनपद गोण्डा अंतर्गत विकास खण्ड परसपुर के सूकर खेत पसका स्थित भगवान वाराह मन्दिर में वाराह जयंती के उपलक्ष्य में पूजा पाठ के साथ प्रसाद वितरण किया जाएगा।
💐पौराणिक महत्व......
कथाओं के अनुसार दैत्यराज हिरण्याक्ष ने अपनी मायावी शक्तियों से पृथ्वी को पाताल लोक में छिपा दिया था। देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर महासागर में प्रवेश किया, हिरण्याक्ष का वध किया और धरती माता को अपने दांतों पर उठाकर पुनः आकाश में स्थापित किया। यह घटना धर्म और न्याय की विजय तथा अधर्म के विनाश का प्रतीक है।
🕉️ तिथि व शुभ मुहूर्त.........
पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष तृतीया तिथि 25 अगस्त को दोपहर 12:35 बजे प्रारंभ होगी और 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे तक रहेगी।
पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 25 अगस्त को दोपहर 1:40 बजे से शाम 4:15 बजे तक रहेगा। इसी कालखंड में भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।
🙏 पूजन विधि......
वराह जयंती पर प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। तुलसीदल, पीले फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित कर ‘ॐ वराहाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप शुभ माना जाता है।
दिनभर उपवास रखने के बाद रात्रि में कथा वाचन, आरती और दीपदान की परंपरा निभाई जाती है। इसे धरती माता के सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
🌏 धार्मिक महत्व........
वराह जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह हमें याद दिलाती है कि जब भी धरती पर संकट आया है, भगवान विष्णु ने अवतार लेकर संतुलन स्थापित किया है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, शत्रु नष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इस व्रत को मोक्ष प्रदान करने वाला और धरती के कल्याण हेतु सर्वोत्तम बताया गया है।

