भौरीगंज स्थित श्रीरामजानकी घाट पर श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण
भौरीगंज स्थित श्रीरामजानकी घाट पर श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। पितृ पक्ष के अवसर पर रविवार को भौरीगंज स्थित श्रीरामजानकी घाट पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुजन अपने पितरों की आत्मा की शांति हेतु सरयू नदी में स्नान कर तर्पण करने पहुँचे। गंगा-सरयू के पावन तट पर पितृ तर्पण हेतु श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही।
वेदपाठी पंडित जगदम्बा प्रसाद तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं से पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न कराया। परंपरा के अनुसार तर्पण में जल, तिल, पुष्प और कुश का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं ने शुद्ध भाव से अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण अर्पित किया।
👉पितृ पक्ष और तर्पण का महत्व.....
हिंदू धर्मशास्त्रों में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इन दिनों में श्रद्धा व आस्था से किया गया तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म पितरों को संतुष्ट करता है। गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में उल्लेख है कि पितरों की तृप्ति से देवता प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
पंडितों के अनुसार, श्राद्ध का अर्थ है "श्रद्धा से किया गया कर्म"। पितृ पक्ष में की गई अर्पण क्रिया पितरों को तृप्त कर उनके आशीर्वाद की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। मान्यता यह भी है कि इन दिनों में पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा करती हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में किया गया तर्पण न केवल पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है बल्कि परिवार की अगली पीढ़ी को भी सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देता है।
👉श्रीरामजानकी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़......
घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी ने पूरे विधि-विधान से पितृ तर्पण में भाग लिया। कई श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भी पिंडदान और तर्पण किया। आस्था का यह अनोखा दृश्य देखकर घाट का वातावरण मंत्रोच्चारण और "पितृदेवाय नमः" के स्वर से गूंजता रहा।
पितरों को तर्पण करते श्रद्धालुगण👉श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव......
तर्पण के लिए पहुँचे श्रद्धालु पण्डित नागेश्वर नाथ शुक्ला ने बताया— “पितृ पक्ष में किया गया श्राद्ध हमारे पूर्वजों की आत्मा को तृप्त करता है। इससे मन को भी अद्भुत शांति मिलती है।”
वहीं श्रद्धालु जगपाल सिंह ने कहा— “हर साल हम पितरों के निमित्त सरयू तट पर तर्पण करते हैं। यह हमारी परंपरा है, और इससे हमें लगता है कि हमारे पितर हमेशा हमारे साथ हैं।”
स्थानीय निवासी हवलदार सोनी ने कहा— “हम मानते हैं कि पितरों का आशीर्वाद ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। इसलिए पितृ पक्ष का हर दिन विशेष होता है।”


