भगवान शिव के छठे ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर का अदभुत रहस्य
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
श्रीशिव महापुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का छठा ज्योतिलिंग के रूप में माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल है जहां भगवान शिव भीमाशंकर के रूप में भक्तो को दर्शन देते है। इस मंदिर की पौराणिक कथाएं भी है जिनमें भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख भी किया गया है।
👉 आईये जानते है कि कहां है भगवान भीमाशंकर मंदिर.......
यह मंदिर महाराष्ट्र में पुणे के समीप एक सह्याद्रि पर्वत माला में स्थित है। जिसे भीमाशंकर नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की अगर ऊंचाई को लेकर चर्चा करे तो इसकी ऊंचाई 3,250 फीट बताई जाती है।
👉 भगवान शिव यहां पर साक्षात करते है निवास......
भक्तो का मानना है कि यहां पर भगवान शिव अपने भक्तो का कल्याण करने हेतु स्वंय निवास करते है। और इस बात का वर्णन धर्मिक ग्रंथो में भी किया गया है। अगर हम सनातनी ग्रंथो की माने तो कहा जाता है कि यहां पर एक बार त्रिपुरासुर नामक राक्षस से भगवान भोलेनाथ का भयंकर युद्ध हो गया था, जिसे भगवान शिव ने युद्ध में पराजित कर विजय हासिल की थी।इस राक्षस के अंत के दौरान बताया जाता है कि यहां पर भीषण गर्मी उत्पन्न हो गई जिसके प्रकोप से यहां निरंतर बहने वाली भीमा नदी भी सुख गई थी। लेकिन इस गर्मी से भगवान शिव के शरीर से इतना पसीना बहा कि यह नदी फिर से लहलहा उठी।
👉 क्यों और कैसे पड़ा इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर......
शिवपुराण के आधार पर कहा जाता है कि कुंभकर्ण का एक पुत्र जिसे भीम नाम से जाना जाता था।यह एक विशालकाय शरीर वाला राक्षस था। इसे इस बात का जब पता चला कि उसके पिता का वध भगवान श्रीराम के हाथों हुआ था। तब उसके शरीर में मानो प्रतिशोध की ज्वाला धधक उठी। उसने मन मे भगवान से बदला लेने की ठान ली,लेकिन भगवान से बदला लेने के लिए उसके पास पर्याप्त शक्तियां नही थी।इसके लिए उसने ब्रम्हा जी की तपस्या करना प्रारंभ किया और इस तपस्या से ब्रम्हा जी प्रसन्न होकर उसे विजय होने का वरदान दे डाला।इसके बाद वह भीम नामक राक्षस ने अपना आतंक करना शुरू कर दिया। जिसके आतंक से परेशान होकर सभी देवगण भगवान शिव के पास जा पहुंचे। भगवान शिव से राक्षस का संहार करने का आग्रह किया। भगवान शिव ने सभी देवताओं का मान रखते हुए उनकी बात को स्वीकारते हुये भीम नामक राक्षस जो जला कर वहीं राख कर दिया था। अब भीम राक्षस का तो अंत हो चुका था पर ऐसी ही बिकराल समस्या फिर कभी यहां जन्म ले इसके लिए सभी ने भगवान शिव से यहीं निवास करने का आग्रह किया। तब भगवान शिव ने सभी देवताओं और भक्तो का मान रखने हेतु यही भगवान भीमाशंकर नाम से ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करने लगे।
👉 आईये जानते है मंदिर की मान्यता के बारे में.......
यहां की मान्यता है कि यहां भगवान शिव आज भी निवास करते है और आए हुए भक्तों का कल्याण करते है। यहाँ पर सावन, शिवरात्रि व कजरी तीज जैसे पावन पर्व पर भक्तो का जमावड़ा बहुत ही बड़ी संख्या में देखने को मिलता है।
