परम्परागत तरीके से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया रक्षाबंधन पर्व,बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर की दीर्घायु होने की कामना
भाई बहन के अटूट विश्वास का पर्व है रक्षाबंधन
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। रक्षा बंधन का पर्व प्रत्येक वर्ष श्रवण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है।भारतीय परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है।
रक्षा बंधन के महत्व को समझने के लिये सबसे पहले इसके अर्थ को समझना होगा. "रक्षाबंधन " रक्षा+बंधन दो शब्दों से मिलकर बना है। अर्थात एक ऎसा बंधन जो रक्षा का वचन ले,इस दिन भाई अपनी बहन को उसकी दायित्वों का वचन अपने ऊपर लेते है।
रक्षा बंधन की विशेषता.......
रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व माना जाता है। एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की एक धागे से बांध ले। रक्षा बंधन को भाई - बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा। बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है। भाई - बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है।
आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है अपितु राखी का अर्थ है, जो यह श्रद्धा व विश्वास का धागा बांधता है। वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है। उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है।