मिलेट्स पुनरुद्धार की दो दिवसीय कार्यशाला का जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया उद्घाटन
रिपोर्ट:- आर के मिश्रा
गोण्डा।। जनपद गोंडा स्थित टाउन हॉल में उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत दो दिवसीय जनपद स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्र के द्वारा किया गया। इस दौरान एलबीएस पीजी कॉलेज की प्रवक्ता डॉ0 रेखा शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष विद्याभूषण द्विवेदी,उपकृषि निदेशक प्रेमकुमार ठाकुर, जिलाकृषि अधिकारी जगदीश प्रसाद,उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी एस एस चौधरी,जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह,उपनिदेशक रेशम आर एन मल्ल,भूमि संरक्षण अधिकारी पारसराम,जिला उद्यान अधिकारी पारस नाथ सहित कृषि एवं अनुषांगिक विभागों के समस्त जनपद स्तरीय अधिकारियों,कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम एवं मनकापुर के वैज्ञानिकों एवं बड़ी संख्या में जनपद के किसानों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
इस दौरान उपकृषि निदेशक प्रेमकुमार ठाकुर ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृषकों को श्रीअन्न मिलेट्स की फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि अपने पोषण संबंधी महत्व के कारण मिलेट्स के अंदर कई चिकित्सकीय गुण होते हैं। जिससे इनके सेवन से मोटापा कम होता है,कोलेस्ट्रोल का लेवल नियंत्रित रहता है,रक्तचाप के नियंत्रण में सहायता मिलती है। इसके अलावा मिलेट्स से बने खाद्य पदार्थ पाचन क्रिया में भी सहायक होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वैज्ञानिक डॉ0 राम लखन सिंह ने प्रमुख मिलेट्स की फसलों यथा ज्वार, बाजरा, सावां, कोदों, रागी आदि के उत्पादन तकनीकी के विषय में कृषकों को विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के वैज्ञानिक डॉ0 अंकित तिवारी एवं इंजीनियर मिथिलेश कुमार झा ने प्राकृतिक एवं जैविक पद्धति से मिलेट्स फसलों के उत्पादन के विषय में उपयोगी टिप्स दिए। एलबीएस पीजी कॉलेज की प्रवक्ता डॉ0 रेखा शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित महिला कृषकों का आह्वान किया कि मिलेट्स के स्वास्थ्य संबंधी एवं चिकित्सकीय गुणों को ध्यान में रखते हुए इससे बने विभिन्न उत्पादों को आहार में शामिल किया जाए। भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने कृषकों को मिलेट्स के फसलों की खेती के लिए प्रेरित करते हुए सभी कृषकों का आवाहन किया है कि वे रसायन मुक्त खेती की तरफ उन्मुख हों। आयोजन स्थल पर कृषि, उद्यान, रेशम एवं अन्य अनुषांगिक विभागों के साथ ही साथ कृषि से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों के द्वारा भी अपने-अपने स्टाल लगाए गए जहां पहुंचकर कृषकों ने उपयोगी जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले कृषकों से संबंधित साहित्य का वितरण भी किया गया।